Monday, December 13, 2010

उठो क्रान्ति के संग....... (~जयंत)



दिल जलता है मेरा,
करकरे की चिता के संग,
राजनीति खेलते उसपर लोग,
जिसने पहना केसरिया रंग...

शहीदों की चितायों पर,
बजा निज स्वार्थ का मृदंग,
सफ़ेद खादी वाले नाच रहे,
खुले आम नंग-धडंग....

सिद्धांत सारे नष्ट हुए,
नैतिकता हुई सरे आम भंग,
पार्थ आज गांडीव उठा,
फिर आज छिड़ी है जंग....

पंजाब, मध्य, गुजरात, मराठा,
द्राविड, उत्तर, पूरब, बंग,
नए क्षितिज को आज थाम लो,
उठो क्रान्ति के संग...

उठो क्रांति के संग,
करो माँ भारती का पूजन,
हवन कुण्ड में आज चढ़ा दो,
हर्षित होकर तन-मन-धन...

माता की तुम लाज बचा लो.
रिपुयों का करके अंग-भंग,
ललकार तुम्हें है आज पार्थ,
पहनो फिर से केसरिया रंग.....


~जयंत चौधरी



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