Thursday, April 30, 2009

* बूंदों का सबक.. *


आशा
, एक संगिनी,
बनती है मेरी सखा,
सूरज फिर निकलेगा,
चाहे कितनी भी हो बरखा...

वर्षा भी अपनी बूंदों में,
जीवन का संदेशा लाती है,
मन के तपते मरुथल में,
आशा की फसल उपजाती है...

जीवन केवल नश्वर है,
मुझको ये भी सिखलाती है,
बनते टूटते बुलबुलों से,
यह गहरी सीख दे जाती है...

और जीवन का चक्र भी देखो,
मुझे चुपके से दिखलाती है,
धरती पर गिर, बहकर ये बुँदे,
फ़िर बादल बनकर छा जाती हैं...

अपनी छोटी सी उम्र में भी ये बूंदें,
धरती पर हरियाली फैलाती हैं,
क्षण भंगुर जीवन को कैसे है जीना,
बस यही सबक हमें सिखाती हैं
....


~जयंत चौधरी
३० अप्रैल २००९

25 comments:

श्यामल सुमन said...

आशा जब हो संगिनी जीवन हो आसान।
रचना अच्छी आपकी खूब लिखे श्रीमान।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

ARUNA said...

वाह क्या सबक है जयंत जी!
आपका भी क्या कहना!

Reecha Sharma said...

sundar , saral , sateek , rachna. keep it up! kuch naya likha hai jaroor padhna

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह जय़ंत भाई कितनी पैनी नजर है आपकी। एक बूँद से जीवन का अर्थ समझा दिया। सच आज की रचना की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। दिल खुश हो गया पढकर। आखिर पंक्तियों का तो जवाब नही।

mark rai said...

वर्षा भी अपनी बूंदों में,
जीवन का संदेशा लाती है,
मन के तपते मरुथल में,
आशा की फसल उपजाती है...

aasha ki fasal....waah kya baat kahi aapne..ham bhi to isi fasal ke intjaar me khade hai ..

Sangeeta said...

'छोटी सी इस उम्र मे हर एक लहर देखी है ,
न हो मालूम आफताब को हमने वो सहर देखी है| sangeeta shukla

Poonam Agrawal said...

Vaah ! varsha ka itna sunder varnan....aksar varsha ko dekhker naye khyaal aate hai man mein...aapke man mein positive vihar aaye....sunder....

Aap vakai badhai ke patra hai....isi tarah likhte rahiye....

अमिताभ श्रीवास्तव said...

jayntji, bahut achcha likhaa he aapne,
isbaar thodaa saa tokunga kyuki, jis mukhya point ko aapne pakdaa he, vo shuruaat ki panktiyo me doosraa lagaa..aap hi dekhiye-
aashaa, ek sangini
banti he meri sakhaa,
SOORAJ fir niklegaa
chahe kitni bhi ho barkhaa...
ynhaa mukhya baat SOORAJ ki pratit hoti he, fir achanak baad me aapne boondo ko le liya..////
vese boonde mere kavi man par bhi giri..rachna ke liye saadhuvaad.

Jayant Chaudhary said...

हे बाज-द्रष्टी आपको नमन...
इसे कहते हैं, डूब के कविता पढ़ना...

आपकी बातों के लिए दो उत्तर हैं..

१) मेरे मित्र मंडल में जयादातर लोग छाए बादलों और बरखा को "depressing" कहते हैं.. इसीलिए आरम्भ में यह भाव "सूरज फिर भी निकलेगा..". उनका मानना है की चमता सूरज, आशा जैसा लगता है.. प्रकाश से मन स्फूर्थित होता है, जबकि अँधेरे के कारण (काले बादल और वर्षा) मन बुझा लगता है..
२) किन्तु मैं उन्हें ये भी बताना चाहता हूँ की वर्षा से भी आशा मिलती है, इसलिए ये भाव...
"... वर्षा भी अपनी बूंदों में , जीवन का संदेशा लाती है ,
कृपया गौर करें... "वर्षा भी" पर... यहाँ "भी" शब्द से दिशा परिवर्तन का प्रयास है..

मैं मानता हूँ की यह स्पष्ट नहीं है..

आपकी तलवार जैसी पैनी द्रष्टि का मैं तो कायल हो गया हूँ..
पर इससे ज़रा सा भी घायल नहीं हुआ हूँ..
क्योंकि, मैंने उसे सुई बना लिया है..
और अपनी कविता के उधडन को सी लिया है..
आगे कोई अवसर नहीं देना है..
यह मैंने अब जान लिया है..

:))

कोटि प्रणाम,
~जयंत

Tripti said...

Dear Jayant,

Nice lines as always.

Hope abides; therefore I abide.
Countless frustrations have not cowed me.
I am still alive, vibrant with life.
The black cloud will disappear,
The morning sun will appear once again
In all its supernal glory.

-Sri Chinmoy

Jayant Chaudhary said...

सुमन जी,

आपने पहली बार पग धरे,
हम बार बार धन्यवाद करें...

सादर जैसे शब्द ना लिखें,
मैं बहुत छोटा हूँ और आप बड़े...

आते रहियेगा
सुमन फैलाते रहियेगा...

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

मार्क भाई, सुशिल जी और रिचा जी,

आप तो मेरे प्रेरणा स्त्रोत हैं..
सदैव उत्साह बढाते हैं...

धन्यवाद ह्रदय की गहराईयों से...

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

Tripti Ji,

Those are fantastic lines.. Thanks for sharing them with me.

And for supporting me always. :)

~Jayant

Jayant Chaudhary said...

अरुणा जी,

आपका प्रकाश मिले तो,
चमका दें इस ब्लॉग को...

धन्यवाद..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

संगीता जी,

निशब्द हो गया हूँ मैं...
विचारों में खो गया हूँ मैं...
डूब के भी उतरा हूँ...
और फिर डूब गया हूँ मैं..

आपने बहुत सुन्दर बात लिखी है..
अपने ब्लॉग पर और लिखें..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

पूनम जी,

मेरा "अनुसरण" करना प्रारंभ किया आपने...
धन्यवाद, बहुत प्रोत्साहन दिया आपने..

बस पूनम के चन्द्रमा मत बन जाइयेगा,
(मेरे ब्लॉग पर) हर दिन रज-रश्मि फैलाईयेगा...

धन्यवाद,
~जयंत

श्यामल सुमन said...

सादर प्रतिभा के लिए नहीं उम्र की बात।
रचना सुमन सुगंध है आते नहीं अघात।।

चेहरे से मासूम हैं प्रतिभावान जयंत।
धन्यवाद सम्मान का अब करता हूँ अंत।।


सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

अमिताभ श्रीवास्तव said...

oh no dear,,
ghayal karne ke liye mene apni baat katai nahi ki thi, mujhe esa lagaa aour mene likhaa...//hna doob kar to padhtaa hoo, achche blog ko jyadaa, kyoki apna sirf ek kaam he khoob khoob pahdhna aour khoob khoob likhna...,patrakaar jo thahra../thodi jyada jimmedaari vaalaa aadmi hoo to padhhna-likhnaa jyada padta he/ vese sach yah bhi he ki aap jeso se khoob sikhne ko milta he..//isliye aapko dhnyavaad bhi doonga..aour hna ek baat..mujhe knhi khtkegaa to tokunga jaroor///uske liye pahle hi sorry kah deta hoo.

Jayant Chaudhary said...

अमिताभ जी,

"पर इससे ज़रा सा भी घायल नहीं हुआ हूँ.."
इन पंक्तियों का मतलब था.. कि सामान्यतः लोग ज़रा से में घायल हो जाते हैं, किन्तु मैं नहीं हुआ क्योंकि
१) आपको मैं समझता हूँ, आपके विचारों को जानता हूँ, इसलिए गलत अर्थ नहीं निकालता... और उसे सकारात्मक तौर पर ही लिया था..
२) कविता में हो रहा था 'फिट',
पर हुआ नहीं वो 'हिट',
और गई कविता 'पिट'...
:))


आपकी तो मैं कद्र करता हूँ.. और प्रश्नों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है.
वोही तो अनमोल मोती हैं जो मेरी कविता-माला को सजाते हैं..
अरे भाई आप (और आप जैसे लोग) ही तो जौहरी हैं जो मुझे तराशते हैं..

कृपया अन्यथा ना लें...
अभी विचार लिखने में थोडा कच्चा हूँ..
आखिर क्या करूँ, मन से बही तक बच्चा हूँ...
:))

~जयंत

रंजना [रंजू भाटिया] said...

पहली बार पढ़ा आपका ब्लॉग .बहुत ही अच्छी लगी यह रचना .अदभुत..शुक्रिया

raj said...

ek chhoti si boond pani ki kya kay sikha jati hai.....really life is too short...

Jayant Chaudhary said...

राज जी,

सच है.... जीवन का एक एक क्षण बहुमूल्य है...
"इसे खोना नहीं, खो के रोना नहीं.."
एक पुराने गाने की ये पंक्तियाँ मुजखे बहुत पसंद हैं..

मेरे ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

रंजू जी,

आप को औरों के ब्लॉग पर देखा था..
मेरे घर (ब्लॉग) कब आयेंगे सोचा था..
पर, मेरी रचना पसंद आयेगी, ये सोचा ना था...

धन्यवाद.. आगे भी आइयेगा..

~जयंत

निर्झर'नीर said...

updeshak rachna ..purmaani

jiivan ka saar kaha hai aapne chand panktiyon mein

bandhaii

गर्दूं-गाफिल said...

सिर्फ व्यंग नहीं है यह दुखदायी सच्चाई है
इतने मार्मिक ढंग से बात सटीक पहुचाई है

बधाई है

Blogvani

www.blogvani.com

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