Tuesday, May 26, 2009

* वो, चुप खड़ी... *

जो,
चुप खड़ी,
परदे के पीछे,
तेरे सपनों को रंगने,
ख़ुद को ही पीसती रही,
तेरे हिस्से के दुःख सहती रही,
तुझे सुखों की छाव में सुलाती रही,
तेरे अस्तित्व हेतु, ख़ुद मिट कर मिटटी बनी,
और खुद को मिटा, तुझमें जीती रही,
रज बन, तेरी ठोकरें खाती रही,
आंसुओं में, वों अपने ही,
धीरे धीरे घुलती रही,
मगर फ़िर भी,
चुप रही,
क्यों?
?

~जयंत चौधरी

कौन है वो? माँ, पत्नी, या कभी बहन?? हर रूप में, है तो वो नारी ही!! उसके त्याग और असीम बलिदान पर खड़े होकर गर्वाते पुरुषों से यह प्रश्न है मेरा.. कभी सोचा वो क्यों चुप रहती है?

क्योंकि.. वो महान है और महानता बिना बोले और जताए परोपकार करने में है..

तुम्हे प्रतिष्ठित करने और सफलता दिलाने में उसका कितना बड़ा योगदान है, कभी विचारा? कभी उसको अपने ह्रदय से खुलकर श्रेय दिया?

19 comments:

अनिल कान्त : said...

mujhe bahut bahut bahut achchhi lagi

haan wo har roop mein mahaan hai ...

AlbelaKhatri.com said...

abhinav....... abhinav ...........abhinav.....
bahut hi achhi kavita
badhai ho!

रंजना said...

Waah !!

kavita ke bhaav prastutikaran sab lajawaab seedhe man me utarne wale hain...

Bada hi achcha laga padhkar.Aabhar.

सुशील कुमार छौक्कर said...

अद्भुत। पढकर आनंद आया। और रचना को एक कला का रुप भी पसंद आया। नया प्रयोग अच्छा लगा।

Priya said...

kavita to behad acchi hain. .... aur uspar aapke likhan ka naya tarika lajawaab .... aapke kavitao mein nari man ki samvednaye dekhne ko milti hain....being a male, how come u r able to write female sentiment?

ARUNA said...

जयंत जी, हमेशा की तरह बहुत बढ़िया है ये कविता.....आपने ये पतंग बहुत अछा बनाया!

Babli said...

बहुत बहुत शुक्रिया!
बहुत शानदार कविता लिखा है आपने!

अमिताभ श्रीवास्तव said...

priya jayant,
bhai kya kahu////
chup yaani sahansheel,,,,dharaa bhi to sahansheel he, aour agar me naaree ke baare apni tippani doo to vah bhi kam rahegi///
bs shat shat naman, aaz itana hi/

Jayant Chaudhary said...

अमित जी,

आपके चंद शब्द भी चाँद जैसे चमकते हैं...
आप आते हैं तो हम चमक जाते हैं..

~जय

Jayant Chaudhary said...

सुशील जी,

बहुत दिन बाद आये,
पर आये तो सही..
हम इसी से खुश है,
आप मिले तो सही.
:)

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

बबली जी,

फोलोअर बनने का बहुत धन्यवाद..
आपने मेरा मान बढाया है..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

प्रिया जी,

आपका नाम सचमुच उचित है.
आप सदैव कर्णप्रिय बातें ही करते हैं.
बहुत बहुत उत्साह बढाते हैं..

धन्यवाद,
जयंत

Jayant Chaudhary said...

अरुणा जी,

बस यह पतंग ऐसे ही उड़ती रहे और सबको राह दिखाती रहे...
इश्वर करे ऐसा ही हो..

धन्यवाद,
जयंत

Jayant Chaudhary said...

अनिल भाई..

आप तो सचमुच प्रेरणा देते हैं.
हम आपको धन्यवाद देते हैं..

!जयंत

Jayant Chaudhary said...

रंजना जी,

हम आपके आभारी हैं..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

अलबेला जी,

आपको अच्छी लगी..
मेरा मान बढा..

धन्यवाद,
जयंत

Priyanka Singh Mann said...

"स्त्रीयता गुहारती", "वो चुप खड़ी","उस माँ को क्या लौटाया" ...सभी नाम तो नहीं लिख सकती पर आप की हर एक रचना एक से बढ़ कर एक है ,बहुत मार्मिक ,भावनाओं से ओत प्रोत ..खुद एक औरत होने के नाते महिलाओं के प्रति आप के सोच ने मुझे बहुत प्रभावित किया ..आप जैसे गुणीजन मेरे ब्लॉग का अनुसरण कर रहे हैं यह मेरे लिए बहुत बड़ा प्रोत्साहन है ..आप जैसे लेखको को पढ़ते हुए खुद को सुधारने का प्रयास रहेगा ..ब्लॉग पर आने के लिए , उसका अनुसरण करने के लिए धन्यवाद

Rajat Narula said...

interesting presentation with great poem...

Anonymous said...

जयंत जी - मैं तो आपके कविताओं पर फिदा हूँ यहाँ ... बस अब चुप :)

Asit

Blogvani

www.blogvani.com

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