Friday, June 19, 2009

* जीवन को तू बना बहार * (~जयंत)

मन के जीते जीत है,
और
मन के हारे हार,
मन चाहे तो पतझड़ भी,
बन जाए
बसंत बहार...

सुख दुःख का तो लगा रहेगा,
जीवन में
मेला बारंबार,
अश्रु
बहाके व्यर्थ ना करना ,
तू अद्भुत जीवन-उपहार...

जैसा
मन चाहे तू जी ले,
मन
को तू कभी मत मार,
जीवन का अनुपम अवसर,
मिलता है केवल
एक बार...

जीवन की लम्बी डगर पर,
कई
पंथी गिरे थक-हार,
भुलाके अपने पग के छाले,
दे उन्हें
सहारा, कर उपकार...

अगिनत
दुष्कर्मों से आहत,
दुःख
से घिरा है ये संसार,
नीलकंठ सा पीड़ा को पी ले,
और
बाँटते चल तू प्यार...

ले जायेगा साँसों की डोली,
इक दिन एक अद्रश्य कहार,
पर अंतिम विदा तक प्राणी
जीवन को तू बना बहार...

~जयंत चौधरी
अप्रैल २४, २००९

(सादर समर्पित कुछ प्रेरक व्यक्तियों को....)
((पिता जी, अमित सर, बाबू जी, बाबा साहेब, अमिताभ जी, तृप्ति जी, सुशील जी, प्रियंका जी... कुछ नाम जो मैं लिख सकता हूँ अभी...) )

17 comments:

ओम आर्य said...

एक अच्छी सन्देश देती कविता जो जीवन को बहार और पढने के बाद उर्जा देती है ........सुन्दर रचना

AlbelaKhatri.com said...

thik kaha aapne ...man ko hamaari kamzori nahin hamaari taaqat hona chahiye,
man hi toh vah ichhashakti deta hai jo bade bade durooh karya bhi hamse karva leti hai...
BADHAAI BADHAAI !
BAHUT UMDA RACHNA BANAAI !

काजल कुमार Kajal Kumar said...

जयंत भाई, सुंदर लिखा है.

nidhitrivedi28 said...

जीवन जीने की प्रेरणा देने वाली कविता है! हताशा को दूर कराती सुन्दर कविता!

अनिल कान्त : said...

आपकी रचना हमेश खूबसूरती लिए होती है...जिंदगी से जुडी ....अच्छा लगता है आपको पढना

M.A.Sharma "सेहर" said...

जीवन के प्रति बहुत आशावादी विचार ,..उत्तम अभिव्यक्ति !!!!

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया रचना .

Tripti said...

Dear Jayant,

You have mentioned my name below the poem, with few great people, if its done purposely then its a great honour which i think i dont deserve but still many thanks.

Further, sorry that could'nt visit your blog for few weeks as a bit busy in india with family.
Take care and keep up good writing .

Jayant Chaudhary said...

Aap sabhi ke aagman aur protsaahan kaa bahut bahut dhanywaad...

Samay ki mahati kami ke kaaran... main sabkee tippaniyon kaa samay par dhanywaad naa de sakaa.. bahut khed hai.

Hamaare shahar men Srhi Raam Mandir kee sthaapanaa ke kaaran bahut wyast chal rahaa hun...

Fir milenge.

Dhayawaad,
~Jayant

Jayant Chaudhary said...

Tripti Ji,

Jee haan, maine aapkaa naam bhi likhaa hai.. Aap bhi prerak hain.
Pranaam.


~Jayant

Priya said...

kavita to bahut umda hain... bas ek confusion hain....aapne apni kavita ke ant mein priyanka naam bhi mention kiya hain .... Is it me ? or someone else.... agar sach mein ham hain to jhoot nahi polengay ...khushi hui ki ham kisi ki prarna bhi ban sakte hain.... aur agar ye bhram hain to bharam hi rahne digiye :-)

अमिताभ श्रीवास्तव said...

भाई जयंतजी,
सूफियाना अन्दाज़ है/ हिन्दी कविताओ मे भक्ति आन्दोलन के समय ऐसे प्रोयोगो ने व्यक्ति को सम्बल दिया था, और आज तक एसी रचनाये इंसान को रास्ता दिखा रही है.
जीवन पर लिखी जाने वाली रचनाये जब समर्पित की जाती है तो इसका सीधा मतलब होता है जीवन को समर्पित कर देना//
आप्की रचना, मेरे सिर आंखो पे.
इसे मेने अप्नी डायरी मे उतार लिया है, जो मेरे साथ आजन्म रहेगी/धन्यवाद,

Priyanka Singh Mann said...

jayant ji ..kavita padhi,bahut acchi lagi..aap to hamesha hi sundar likhte hain.bhagat singh ji ki post par aapke vichar bhi padhe ,aap se purnataya sahmat hun ki aajkal kisi ko fursat nahin hain unhe yaad karen par phir jaisa ki aapne ne likha ki kuch log abhi bhi hain (aap jaise)jo unki vichardhara ka aadar karte hain..aadar se yaad karne vale yadi kuch bhi hain to bhi accha hai..
itna samman aap se kuch hi dino main mila hai..pata nahi main vakai hi us ke layak bhi hun ki nahin..

Jayant Chaudhary said...

प्रिया जी,

सच कहूँ आपका नाम छूट गया था... प्रियंका जी के नाम के साथ थोडा मिक्स हो गया था.
किन्तु आप भी समर्पण के अधिकारी हैं.. :)

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

प्रियंका जी,

आप इस योग्य हैं इसलिए मैं आपको समर्पित की थी मेरी कविता.
एक फौजी की पत्नी होना ही बहुत था, किन्तु आप तो उत्तम व्यक्तित्व और लिखाण की भी स्वामिनी हैं.
सादर प्रणाम.

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

अमिताभ जी,

आपने इसे अपनी डायरी में स्थान दिया...
मेरे लिए इतना ही बहुत है.

~जयंत

Sangeeta said...

you did not write my name... :(
just kidding....very nice n inspiring...keep it up
sangeeta

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