Friday, December 13, 2013

तू भिखारी नहीं है....

मांग मत,
तू भिखारी नहीं,
हाथ उठा, जोर लगा,
कि नाम तेरा, लाचारी नहीं

जहां पाँव पड़े तेरे,
नदिया बहे, क्रांति का,
चूर चूर हो, गिर पड़े,
किला, बेबसी और भ्रान्ति का

स्वतन्त्र होकर, उड़ चले,
फिर पांखी, तेरी आस का,
बह चले, उस गगन में,
उगे जहाँ सूर्य, प्रगति का 

मत थम,
तू मृत नहीं,
कदम उठा, हिम्मत जुटा,
क्योंकि नाम तेरा, पराजित नहीं।।।।।।।

जयंत चौधरी 
(माँ दुर्गा कृपा !!!)

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