Wednesday, December 11, 2013

कुछ बेगाने...

सपने,
कुछ सपने,
सपनों में ही रह जाते हैं,
कुछ सपने,
सच होकर,
झूठ बन जाते हैं..।

अपने कुछ, बेगानों से, बेगाने हो जाते हैं,
अपने कुछ, बेग़ागों से भी बेगाने, हो जाते हैं,
कुछ बेगाने,
अपनों से भी अपने हो जाते हैं.....

जयंत चौधरी 

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