Friday, December 13, 2013

तू भिखारी नहीं है....

मांग मत,
तू भिखारी नहीं,
हाथ उठा, जोर लगा,
कि नाम तेरा, लाचारी नहीं

जहां पाँव पड़े तेरे,
नदिया बहे, क्रांति का,
चूर चूर हो, गिर पड़े,
किला, बेबसी और भ्रान्ति का

स्वतन्त्र होकर, उड़ चले,
फिर पांखी, तेरी आस का,
बह चले, उस गगन में,
उगे जहाँ सूर्य, प्रगति का 

मत थम,
तू मृत नहीं,
कदम उठा, हिम्मत जुटा,
क्योंकि नाम तेरा, पराजित नहीं।।।।।।।

जयंत चौधरी 
(माँ दुर्गा कृपा !!!)

जीवन मेरा


आँसू जितने जीवन से मिले,
मन बगिया को सींचा मैंने,
पत्थर जितने राहों में चुभे,
उनसे सेतु बांधा मैंने,

अंगारे जितने बसरे मुझ पर,
उनसे जीवन-दीप जलाये मैंने,
काटें जितने चुभे मुझको,
उनसे फूलों को पिरोया मैंने,





 

Wednesday, December 11, 2013

कुछ बेगाने...

सपने,
कुछ सपने,
सपनों में ही रह जाते हैं,
कुछ सपने,
सच होकर,
झूठ बन जाते हैं..।

अपने कुछ, बेगानों से, बेगाने हो जाते हैं,
अपने कुछ, बेग़ागों से भी बेगाने, हो जाते हैं,
कुछ बेगाने,
अपनों से भी अपने हो जाते हैं.....

जयंत चौधरी 

Tuesday, December 10, 2013

जीवन की सीढ़ी

जीवन के हर पल को जीता,
एक अनमने योद्धा के जैसे,
किन्तु अर्जुन नहीं हूँ मैं ,
मेरा कोई कृष्ण नहीं है,

हर सांस तोड़ जाती है,
कुछ पायदान जीवन की सीढ़ी से,
पर पीछे हट जाऊं मैं,
इसका कोई प्रश्न नहीं है,

~ जयंत चौधरी



 

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