Wednesday, February 23, 2011





राही को ढूंढती मंजिल नहीं, उसे स्वयं ही चलना होता है,
हो जितना भी सच्चा राही, रस्ता, उतना ही मुश्किल होता है...

~जयन्त
१ मार्च २०११
१० फाल्गुन १९३२

6 comments:

शिखा कौशिक said...

आपकी प्रस्तुति सराहनीय व् सुन्दर हैअच्छे लेखन के लिए बधाई .रास्ता कितना भी मुश्किल हो पर हमको चलना होता है ......

Dinesh pareek said...

ब्लॉग की दुस्निया में आपका हार्दिक स्वागत |
बहुत ही सुन्दर लिखा है अपने |
अप्प मेरे ब्लॉग पे भी आना के कष्ट करे
http://vangaydinesh.blogspot.com/

सतीश सक्सेना said...

यह तो सच है !

बेईमानों के लिए अक्सर शोर्ट कट मिलते हैं, सच्चों के लिए नहीं ! ईमानदारी के लिए रास्ता मुश्किल है !
केवल हिम्मती लोग ही इस रास्ते जाएँ ....
फैसला करलें :-)
....शुभकामनायें चौधरी !!

सतीश सक्सेना said...


यह तो सच है बेईमानों के लिए अक्सर शोर्ट कट मिलते हैं सच्चों के लिए नहीं ! ईमानदारी के लिए रास्ता मुश्किल है !

केवल हिम्मती लोग ही इस रास्ते जाएँ ....
फैसला करलें :-)
....शुभकामनायें चौधरी !!

ZEAL said...

Beautiful thought .

Richa said...

राही को ढूंढती मंजिल नहीं, उसे स्वयं ही चलना होता है,
हो जितना भी सच्चा राही, रस्ता, उतना ही मुश्किल होता है...

sahi baat likhi..

Blogvani

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