Tuesday, February 22, 2011

*** राह के अँधेरे...***




चलते चलते अचानक,
जब सूर्यास्त हो जाए,
और राह के अँधेरे जब,
बढ़ कर तुझे लीलने लगें...

कभी ना थकने वाले,
कभी ना रुकने वाले,
कदम जब खुद बखुद,
पीछे हटनें लगें...

घनघोर बरसती,
बारिश में जब,
सर के साये भी,
गलनें लगें...

चंहु और विपदा से,
जब घिरा हो तू,
निराशा के जहरीले नाग,
तुझे डसने लगें...

तब याद इसे,
रखना राही,
होंगे ऐसे,
इंसान बिरले....

जो जग में,
जीवित रहकर भी,
इन तकलीफों से,
ना हों गुजरे.....

है सफल वही,
इस दुनिया में,
जिसने कभी,
हौसले नहीं हारे.....


जयन्त
(फरवरी १५, २०११)
(माघ १६, `१९३२)

9 comments:

शिखा कौशिक said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति .आभार.....

हरकीरत ' हीर' said...

जो जग में जीवित रहकर भी इन तकलीफों से हो ना गुजरे.....
है सफल वोही इस दुनिया में जिसने नहीं कभी हौसले हारे.....

बिलकुल सही ...
नहीं हारेंगे जी ......

शिवकुमार ( शिवा) said...

बहुत सुंदर रचना बाधाई
कभी समय मिले तो http://shiva12877.blogspot.com ब्लॉग पर भी अपनी एक नज़र डालें,
कृपया फालोवर बनकर उत्साह वर्धन कीजिये.

Patali-The-Village said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति| आभार|

वीना said...

जिसमें आत्म विश्वास है वह कभी नहीं हारता और नहीं हारने वाला ही मजबूत कदम के साथ चलता है
बहुत सुंदर
आपका ब्लॉग फालो कर लिया है ताकि जब आप नई पोस्ट डालें तो पता चल जाए...
आप भी जरूर आइए...

रंजना said...

पहले ब्लोग्वानी के रास्ते अक्सर आपके ब्लॉग तक जाना हो पाता था,पर ब्लोग्वानी क्या छूटी बहुत सारा कुछ अनपढ़ा छूटने लगा...
अब नियमित पढूंगी...ब्लोगरोल में डाल लिया है...
इतने इतनी सार्थक और प्रभावशाली ढंग से सकारात्मकता के संचार के लिए आपका ह्रदय से आभार...

रचना इतनी सुन्दर और मर्मस्पर्शी बन पड़ी है कि मैं क्या कहूँ...
ऐसे ही सुन्दर लिखते रहें, अनंत शुभकामनाएं...

Dinesh pareek said...

ब्लॉग की दुस्निया में आपका हार्दिक स्वागत |
बहुत ही सुन्दर लिखा है अपने |
अप्प मेरे ब्लॉग पे भी आना के कष्ट करे
http://vangaydinesh.blogspot.com/

Prarthana gupta said...

very inspiring......like it....

संजय भास्‍कर said...

सार्थक प्रस्तुति

Blogvani

www.blogvani.com

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