Thursday, February 10, 2011

** तू अकेला नहीं.... **



एक तू ही अकेला नहीं,
आग के दरिया से गुजरे हैं कई,

पाँव के छालों से ना घबरा,
जल कर भी उस पार पहुचें हैं कई,

जीवन कभी रुकता ही नहीं,
साँसों के संग चलना होगा तुझे भी,

उसे ही मिलेगी जयमाला,
जो स्वीकारेगा यह चुनौती....

~Jayant
10 Feb 2011

10 comments:

pooja said...

as usual very nice.....u write very well keep it up.........

Jayant Chaudhary said...

Woww Pooja Ji, you came here after a very long time.. So nice to see you.
Yes, I have been absent too, so I can not complain. :-)

संजय भास्कर said...

very nice...

ZEAL said...

.

पाँव के छालों से ना घबरा,
जल कर भी उस पार पहुचें हैं कई,

So true !

.

Jayant Chaudhary said...

संजय जी, जील जी,

धन्यवाद!!!

anu said...

एक तू ही अकेला नहीं,
आग के दरिया से गुजरे हैं कई,

पाँव के छालों से ना घबरा,
जल कर भी उस पार पहुचें हैं कई,


बहुत उम्दा रचना ...

Jayant Chaudhary said...

अनु जी,

बहुत बहुत धन्यवाद... आप आये और उत्साह बढ़ाया.

जयन्त

वीना said...

जब चल दिए तो छालों से क्या घबराना.....
बहुत सुंदर....
ब्लॉग भी फॉलो कर लिया है...

Jayant Chaudhary said...

वीणा जी,

बहुत बहुत धन्यवाद...

जयन्त

रंजना said...

सत्य....चिर सत्य...

जिसने इसे स्वीकारा,जीवन में उतारा...वह कभी नहीं हारा...

Blogvani

www.blogvani.com

FeedBurner FeedCount