Thursday, September 9, 2010

हिन्दुस्तान का सर काट दो


जब मैं विदेश पढ़ने गया,
और कॉलेज में जा पहुंचा,
तब हिन्दुस्तानी संगठनों को,
जोश खरोश से ढूंढ़ने लगा,

बहुत खोदा बहुत देखा,
एक दिन एक का पता लगा,
वो १५ अगस्त मनाने वाले हैं,
ऐसा किसी से उड़ते उड़ते सुना,

सुन कर मैं भी बहुत प्रसन्न हुआ,
कई दिनों के बाद दिखेगा तिरंगा,
सोच कर मन हुआ बहुत चंगा,
जैसे मरुथल में मिल जाए गंगा,

तन का तो पता नहीं,
मन ही मन बहुत उड़ा,
उड़ते उड़ते एसोसिएसन के,
द्वार खटखटाने जा पहुंचा,

जितनी जोर से उड़ रहा था,
उससे भी ज्यादा शोर से गिरा,
जब एसोसिएसन के दरवाजे पर,
मेरे प्यारे भारत का सर कटा दिखा,

क्योंकि वहाँ ऐसा नक्शा लगा था,
जिसमें काश्मीर कहीं नहीं था,
जब मैं भारत से निकला था,
तब तो वो वहाँ ही था,

मैं कुछ दिन क्या दूर रहा,
पता नहीं बीच में क्या हुआ?
धरती निगल गयी, या,
आसमान ही खा गया?

उस ऑफिस से बाहर निकलते,
देसी को पकड़कर मैंने पूछा,
इसमें गलत है क्या?
वो बोला, इसमें गलत है क्या? तू बता!!

जब भारत का कटा सर,
मैं उसे दिखाया,
तो उसने बहुत देर तक अपना,
गंजा होता सर खुजाया,

फिर भी उसकी समझ ना आया,
क्यों मैं इतना है शोर मचाया,
बहुत मैं प्रयास किया,
तब जाकर उसे कुछ दिखा,

आखिर वो बोला,
आखिर आप कहाँ जी रहें हैं,
काश्मीर कब का कट गया,
आप अभी तक सपनों में जी रहे हैं??

भारत के अलावा,
कोई काश्मीर को भारत का नहीं मानता,
अरे अमेरिका की छोड़ो,
अब तो भारतीय भी काश्मीर को नहीं जानता,

एक दिन ऐसा आयेगा,
जब हिन्दुस्तानी नक़्शे में भी,
काश्मीर अलग दिखाया जाएगा,
तब तू कहाँ जाकर चिल्लाएगा...

....

और आज उसका कहा,
सच ही निकल गया,
देखते ही देखते
भारत का नक्शा बदल गया...

.................................................................

ये देखिये, भारत में बिक रही एक कॉपी के पिछले प्रष्ट पर छापा ये नक्शा!@!

12 comments:

वन्दना said...

ये तो हद हो गयी………………वैसे आपकी कविता ने आईना दिखा दिया।

AlbelaKhatri.com said...

सच !

खेदजनक !

परन्तु ऐसे नक़्शे मैंने कई बार देखे हैं विदेशों में जिनमे कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है

वाकई चिन्ताजनक !

Jayant Chaudhary said...

खत्री साहेब,

सच है विदेशों में तो यह देखा है...
किन्तु भारत में?? और तो और बच्चों की कॉपी किताबों में?
येही चलता रहा तो एक दिन सचमुच भारतीय बच्चे ही भूल जायेंगे काश्मीर भारत का अंग था/है!!

Jayant Chaudhary said...

वन्दना जी,

आप हमेशा पढ़ते हैं मेरी पोस्ट को... बहुत धन्यवाद...

जयंत

अमिताभ श्रीवास्तव said...

प्रिय जयंतजी,
मृत्युंजय विचार...। एक टीस। वेदना। चित्कार। और आग्रह...। देश के लिये, सच्चे देशप्रेमी के लिये...।
हां, कई जगह देखा है..अब ऐसा होने लगा है..जिस योजना के तहत इसे प्रसारित किया गया वो लगभग सार्थक हो रही है.., इसे आप हमारी राजनैतिक नपुंसकता कह सकते हैं। और यह भी कि बावजूद ऐसा कोई प्रयास नहीं किया जा रहा जिसमें हमारी पीढी, आने वाली पीढी अपने भारत को अच्छी तरह से जान, समझ सके। अगर यह विडम्बना है तो ..इस तरह के कथित प्रयास होते रहेंगे..और एक दिन सचमुच........। वैसे..हम ऐसा होने नहीं देंगे..जब तक जीवित हैं..। अपने स्तर पर भारत को बच्चों बच्चो तक पहुंचाने का कार्य जारी है..

Gourav Agrawal said...

खेदजनक !
कविता ने सारा दर्द व्यक्त कर दिया ...
बेहद प्रभावशाली पोस्ट

स्कूली किताबों से ही शुरू होता है इतिहास और वर्तमान का गलत पाठ /चित्रण

डॉ० डंडा लखनवी said...

आप ने की कविता में देश प्रेम की भावना सराहनीय है। इस जज्बे के लिए आपको बधाई। इसके साथ आपको यह बताना चाहता हूँ कि हिंदू और हिंदूस्तान शब्द भी उधार का है। यह शब्द कहाँ से आया और किसके लिए प्रयोग किया गया इसकी जानकारी किसी भाषा-वैज्ञानिक से लीजिए। अच्छा हो अपने देश दे लिए ’भारत’ शब्द को प्रयोग में लाएं जो कि संविधान-सम्मत और स्वदेसी है।
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

kapil said...

ऐसे देश प्रेमी को मेरा सादर प्रणाम | जब तक भारत के धरती पे वीर जनम लेते रहेंगे कोई कश्मीर को अलग नहीं कर पायेगा.
अलख जागते रहिये |

निर्झर'नीर said...

और आज उसका कहा,
सच ही निकल गया,
देखते ही देखते
भारत का नक्शा बदल गया.???????????????

सादर प्रणाम

बहुत दिन बाद आना हुआ आज आपकी कई कवितायेँ पढ़ी देशप्रेम से ओत प्रोत ..इस कविता ने तो साडी वेदना ही बहार निकाल दी .

पथिक.... said...

कोई फिर माँ को देखता है बुरी नजरों से ...
ले कफ़न, चल कि रूह बांधे, सर कलम कर दें....

Pahal A milestone said...

bhai baat pate ki or logon ko aina dikhane ki bhi he lekin kya aap iis adhure sach ko manne ke liye teyaar hen iis aine se bhi hum bhartion ko samjh nahi ayga ki kashmir bharat ka hissa tha or rahega ...... apne apne jazbaton ko bakhubi likha he age bhi likhte jayen shayad bhartvasiyon ki soi atma jag jaea

क्रांतिकारी हिन्दोस्तानी देशभक्त said...

बहुत अच्छा लिखा है लिखते रहिये

Blogvani

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