Saturday, September 4, 2010

जीवित हूँ मैं, मुर्दा नहीं....

तूफ़ान उठे,
बिजली गिरी,
झुकी नहीं,
पर नज़र मेरी....

बढ़ता चला,
मैं राहें बना,
गढ़ता गया,
सपना नया....

धरती थकी,
पर कदम नहीं,
पा लूंगा मैं,
मंजिल नयी...

बेदम नहीं,
बेबस नहीं,
जीवित हूँ मैं,
मुर्दा नहीं....

जयंत चौधरी
माँ दुर्गा को समर्पित
१२ भद्र / ०२ सितम्बर 2010


6 comments:

वन्दना said...

बेहद उम्दा ख्याल्…………………माँ दुर्गा यही भाव बनाये रखें।

अनिल कान्त : said...

achchha hai

AlbelaKhatri.com said...

यही जीवट

यही ऊर्जा

और यही पराक्रम हम सब में देखना चाहते हैं........

बधाई...इस ऊर्जस्विता और ओजस्विता के लिए

Gourav Agrawal said...

बड़े अच्छे ख़याल आते मित्र आपको .....
भावुक और सराहनीय पंक्तियाँ ......

Gourav Agrawal said...

बड़े अच्छे ख़याल आते हैं मित्र आपको .....
भावुक और सराहनीय पंक्तियाँ ...

neha said...

bahut pyari rachna ha apki......as usual har rachna ki tara bahut sunder.........

Blogvani

www.blogvani.com

FeedBurner FeedCount