Wednesday, June 16, 2010

** काँपते हाथों में **

है यकीन मुझे,
जानता हूँ, कि
तेरे काँपते हाथों में,
जान अभी बाकी है...

माना बहुत है,
पर, तू भार उठा,
जोर लगा, कि
अरमान एक बाकी है....

यह जिंदगी,
एक प्याला है,
और मौत,
तेरी साकी है...

पीता चल,
चलता चल,
जब तक,
जाम एक बाकी है....

मधु बहती है,
कविता उड़ती है,
पंखों में थोड़ी
उड़ान अभी बाकी है....

अरमान अभी बाकी है..
थोड़ी जान अभी बाकी है...


जयंत

12 comments:

वन्दना said...

यह जिंदगी,
एक प्याला है,
और मौत,
तेरी साकी है...

बहुत ही सुन्दर भावों से लबरेज रचना।

आचार्य जी said...

सुन्दर रचना।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

एक आशामयी सुंदर कविता.

रंजना said...

वाह...वाह...वाह...सुन्दर भाव... मनमोहक सुन्दर रचना......

दिलीप said...

bahut sundar rachna...

Maria Mcclain said...

interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this site to increase visitor.Happy Blogging!!!

Divya said...

ah.. finally i am here. I tried many times but the blog was not opening.

माना बहुत है,
पर, तू भार उठा,
जोर लगा, कि
अरमान एक बाकी है....

Beautiful creation and indeed very inspiring.

सुलभ § Sulabh said...

जयंत जी,
कविता पसंद आई, बहुत बढ़िया !!

abhinav pandey said...

मेरे द्वारा एक नया लेख लिखा गया है .... मैं यहाँ नया हूँ ... चिटठा जगत में.... तो एक और बार मेरी कृति को पढ़ाने के लिए दुसरो के ब्लॉग का सहारा ले रहा हूँ ...हो सके तो माफ़ कीजियेगा .... एवं आपकी आलोचनात्मक टिप्पणियों से मेरे लेखन में सुधार अवश्य आयेगा इस आशा से ....
सुनहरी यादें

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सुंदर कविता है भाई जयंत जी.

Priya said...

यह जिंदगी,
एक प्याला है,
और मौत,
तेरी साकी है..

Lajawaab upmaa

मधु बहती है,
कविता उड़ती है,
पंखों में थोड़ी
उड़ान अभी बाकी है....

bas isi udaan se to hausla hai

udte rahiye...very inspirational

निर्झर'नीर said...

bahut gahri baat ..daad hazir hai kubool karen

Blogvani

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