Saturday, January 9, 2010

कहाँ गया वो? उसे खोजो..


एक
नादाँ बालक था वो,
जग
से अनजाना था वो,
ओस
की बूँद सा था वो,
जाने
कहाँ गया वो....

रोते
रोते हँसता था वो,
गैरों
के लिए रोता था वो,
उजली
किरण सा था वो,
जाने
कहाँ गया वो....

कालचक्र में पिस गया वो,
धूल में गुम गया वो,
कैसे बिछड़ गया वो,
जाने
कहाँ गया वो...

माँ का प्यार था वो,
दादी का दुलार था वो,
मेरा बचपन था वो,
कोई तो उसको खोजो....

~जयंत चौधरी
९ जनवरी, २०१०

(मानता हूँ की इसमें थोड़ा सा प्रभाव '३ इडियट्स' के गाने का है॥ किन्तु भाव मेरे हैं और मेरे खोये बचपन के लिए हैं... आशा करता हूँ आप समझेंगे..)

9 comments:

Kulwant Happy said...

बहुत शानदार, अद्भुत

Priya said...

bachpan ki talash hai kya? wo to apne ander hi hota hai......jab chaho baccha ban jao simple.....:-)

अनिल कान्त : said...

Bachpan ko Talshti rachna padhkar sukhad ehsaas hua

वन्दना said...

bahut hi sundar rachna bilkul bachpan si.

Razi Shahab said...

behtareen rachna

Tripti said...

Never allow to grow the child inside you, and incase you have, reborn it again, life is beautiful with the heart of a child.

Always feel good after visiting your blog, keep adding.

Have a great day.

निर्झर'नीर said...

exceelent

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत सुन्दर. पिछले दिनों जब कडाके की ठंड थी तो मेरे मन में केवल कारगिल या लेह में तैनात जवानों का ही खयाल आया था.

संजय भास्कर said...

bahut hi sundar rachna bilkul bachpan si.

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