Wednesday, January 6, 2010

~~ आल इज्ज़ वेल!! ~~



भैया सब् ठीक है!! चाचू सब् ठीक है!! बेटा सब् ठीक है!! आल इज्ज़ वेल!!

यह तो मेरे जीवन का मूल मन्त्र रहा आया है वर्षों से, और अब इसे एक सुन्दर गाने के रूप में देखना... आनंद आगया।

जो हो रहा है, वोह भी ठीक है, जो होगा वो भी ठीक ही होगा....
इसे पलायनवादी या झूठी सांत्वना वाला मंत्र ना माने, इसके अंतर में गहरा मतलब है छुपा हुआ।
फिल्म में भी आमिर का मित्र कहता है, "सिर्फ आल इस वेल सोचने से तो कुछ नहीं हो जाता?", उसके उत्तर में जो रांचो कहता है, उससे मैं शत प्रतिशत सहमत हूँ। माना की आल इज्ज़ वेल कहने से ही सब् ठीक नहीं हो जाता, पर मन को शान्ति मिलती है, और शांत चित्त से ही व्यक्ति कठिनाइयों से लड़ने का सही तरीका सोच सकता है।
मन पर नियंत्रण किसी भी खिलाड़ी, सैनिक, पायलेट, अन्तरिक्ष यात्री आदि के लिए उतना ही आवश्यक है जितना जीने के लिए वायु॥ नाजुक समय पर नियंत्रण खो देने से हार या मृत्यु का भी सामना हो सकता है..

'मन के हारे हार है, और मन के जीते जीत...'
'कहिये तो आसमान को ज़मीन पर उतार लायें, मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिये...'

मन चीज़ ही ऐसी होती है, यह घबराहट में बना बनाया काम बिगाड़ दे, और यदि धीरज धारण करें तो, बिगड़ता काम बना ले।

भारतीय वायु सेना में मेरे एक मित्र थे जो एक किस्सा बताते थे १९७१ के भारत-पाक युद्ध का।
"एक था पायलेट पंडित... बड़ा गजब का लड़ाका था... कितने ही बार मौत के मुख से जीवित वापस आया, औरपाकी लोगों को हरा कर ही आता था... जब लौटला था, तो कई बार उसके प्लेन को देख कर यकीन ही नहीं होता था, कि इसमें बैठा कोई जीवित बचसकता है, ऐसा प्लेन लैंड भी कर सकता है... छिन्न भिन्न हुआ प्लेन, विंग्स में कई छेद, फिन के टुकड़े टूटे हुए... पर हर बार लौटता था वो ... कोई और होता तो शायद प्लेन को हवा में छोड़ कर कूद जाता, या डर के कारण क्रेशकर देता... मर जाता... पर वो, वो अकेला था... ऐसा जाँबाज जो उस हाल में भी लड़ कर सलामत वापस आता था॥

जानते
हो उसका राज क्या था??

उसके
चेस्ट पॉकेट में रखी राम-चरित-मानस की छोटी प्रति!!! उसका कहना था, कुचरू जी, जब तक यह मेरे सीने से लगी है, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा!!!"

इस सच्चाई के पीछे बस एक ही बात है... जब तक मन पर नियंत्रण है, जब तक मन में विश्वास है, जब तक मन में हार नहीं है, तब तक, तब तक, विजय हमारे साथ है।

ऊपर लगे चित्र से यही बताना चाहता हूँ मैं, जीवन का अंत नहीं होता, झड़ते हुए पुष्प के नीचे से नयी कोपलें आ रही हैं, नए पुष्प फिर उसमें खिलेंगे...
तो भैया, आल इज्ज़ वेल!!!!!


आज इतना ही,
~जयंत चौधरी
जनवरी, २०१०

3 comments:

अमिताभ श्रीवास्तव said...

"usake chest pocket me rakhi RAAM CHARIT MANAS ki chhoti prati...,"
yahi he.asal vishvaas aour asal insaan hone ki pahchan..., RAAM. jisake saath uska kya bigadega...

Priya said...

bhai .......maza aa gaya padhkar....ek hope dedi aapne to.....chalte chate....."ALL IS WELL"

mark rai said...

very nice....all is well..

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