Tuesday, January 5, 2010

हिन्दू “नाबालिग” लड़की भगाना शरीयत के मुताबिक जायज़ है? तथा दीप प्रज्जवलित करना “गैर-इस्लामिक” है? : पढ़िये दो सेकुलर खबरें (सुरेश

सुरेश जी,

आपको शत शत नमन...
कृपया और से भदकाऊ पोस्ट लिखते रहें ताकि सलीम जैसे लोग और भड़क सकें आप के खिलाफ।
आखिर सच तो कड़वा होता है। तो कड़वी गोली आसानी से नहीं खाई जाती है ना!!!!

जहां तक न्यायालय की बात है... तो क़ानून अंधा ही तो होता है॥ खराबी तो क़ानून में ही है ना॥
अच्छा है की मैं "हिन्दू"स्तान में नहीं हूँ, नहीं तो खुदा जाने मेरी बेटियों का क्या होता... कोई भगवान् ना करे ऐसे किसी लव जिहाद वाले से मिलती तो... इससे तो अच्छा सेकुलर अमेरिका है जहां दुहरी क़ानून पद्धति नहीं है॥ और १८ साल से कम की लड़की से हुए यौन संबंधों को "कानूनन बलात्कार" ही माना जाता है, चाहे स्वेच्छा से हुया हो॥

दिया के बारे में ज्यादा नाराज ना होंए... एक दिन राष्ट्र ध्वज का रंग भी हरा होने वाला है... और "अधिनायक जय हे" भी गैर-इस्लामिक हो जाएगा क्योनी खुदा की अलावा किसी और की जय बोलना भी तो गैर-इस्लामिक होगा ना!!!!!

ताजुब्ब है किसी ने अभी तक इस पर बवाल नहीं मचाया??

~जयंत

4 comments:

पी.सी.गोदियाल said...

आपकी बातो से पूरा इत्तेफाक रखता हूँ !

संजय बेंगाणी said...

आप तो अब राष्ट्रगीत को ही गैर इस्लामिक घोषित करवा के रहोगे....

अज्जु कसाई said...

nice post : उधर 18 साल के बाद मजे ही मजे, इधर हमारा काम मन्‍दा है,हम एक दिन में 35 सुअर झटक सकते हैं, उधर सूअर के मांस का कारोबार कैसा है, हम भी उधर आना चाहते हैं ताकी मांस के कारोबार के साथ उन 18 साल से उपर की अमेरिकन बेटियों के साथ मजे ही मजे

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

भारत में भी ऐसा ही है कि सोलह वर्ष की आयु से कम की लड़की के साथ सहमति और 12 वर्ष से कम की पत्नी के साथ संभोग को बलात्कार माना गया है। संजय बैंगाणी जी और सुरेश जी जिस खबर की बात कर रहे हैं वह अधूरी प्रतीत होती है। जिस मामले में अभियुक्त को जमानत दी गई है उस में मामला सहमति का था और प्रथम सूचना रिपोर्ट में कन्या को नाबालिग कहा गया है लेकिन मेडीकल रिपोर्ट अथवा स्कूल प्रमाण पत्र के रूप में कन्या के बालिग होने के सबूत अदालत के सामने होंगे तभी अदालत इस मामले में जमानत आदेश दे सकती थी अन्यथा नहीं। लेकिन लगता है रिपोर्टर कन्या के बालिग होने की बात को छुपा गया वर्ना समाचार में सुर्खी नहीं आती। मैं ने इस घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का प्रयत्न किया लेकिन वह उपलब्ध नहीं है। यदि होती और कन्या बालिग होती तो यह भी कहा जा सकता था कि न्यायाधीश ने गलत निर्णय किया है। इस मामले में तथ्यों की पूरी जानकारी होने पर ही रिपोर्ट को अदालत की गलती के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए था।

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