Tuesday, July 7, 2009

* राह में हो अँधेरा तो...! * (~जयंत)


कई घटनाएँ देखकर (और कुछ का भुक्तभोगी बनकर) मन थोड़ा सा विचलित हो गया था... विगत कई दिवसों से समय का घोर अभाव चल रहा था... और उससे बड़ी बात थी; मन
लग नहीं पा रहा था.. कविता, साहित्य आदि में... बहुत सी व्याधियां हैं और चुनौतियां हैं अभी जीवन में.... संघर्ष जारी है... :)
इस बी
मेरे कुछ प्रिय और आदरणीय 'प्रेरणा-स्रोतों' के प्रोत्साहन से कुछ लिखा है...

राह में हो अँधेरा तो,
ख़ुद को ना पलटने दे,
आखों में आग पैदा कर,
ख़ुद ही मशाल बना ले....

सीने में हो आग तो,
ख़ुद को ना झुलसने दे,
कीट* को पिघला कर,
मन को लौह का बना ले...

हाथ जो पिरने लगे तो,
उनको तू ना रुकने दे,
ख़ुद को चुनौती देकर,
शक्ति का संचार कर ले....

~जयंत
७-७-२००९

कीट* =
खनिज जिसमें पत्थर के साथ लौह होता हैयहाँ कीट से तात्पर्य कच्चे मन से है... जिसे पिघला पर (संकट की अग्नि में), शुद्ध लौह (मजबूत और दृढ) का रूप दिया जा सकता है


12 comments:

AlbelaKhatri.com said...

aapko aur aapki kavita ko punah: paakar man prasann hua...

bahut hi umda kavita
badhaai !

jayantji,
kahne ki aavashyakta nahin ki yahan har aadmi kisi na kisi sankat se joojh raha hai ...sab k apne dard hain , apni takleefen hain .........lekin aap jaise yoddha log har vyadhi ,har sankat ko haraa kar apnee manzil ka raasta tay kar lete hain

ishwer aapke saath hai aur har wakt saatha hai...

WISH YOU ALL THE VERY BEST

GOOD LUCK !

सुशील कुमार छौक्कर said...

एक जोश भरती रचना। हर शब्द कुछ कह रहा है। बहुत ही उम्दा रचना।

mark rai said...

fantastic,,,,,

ओम आर्य said...

bahut hi sundar rachana.........

awaz do humko said...

बहुत खूब सुन्दर रचना

गौतम राजरिशी said...

जयंत, आप हमेशा चौंकाते हो आपने शब्दों से अपनी रचनाओं से...जितना पढ़ता जाता हूँ, आपको नजदीक पाता हूँ।

Tripti said...

Hi jayant,

Very true that some indidences in life affect you a lot.
Well written.

Babli said...

बहुत ही शानदार रचना लिखा है आपने! आपकी हर एक रचना में अलग ही बात होती है! मुझे बहुत पसंद आया ! लिखते रहिये!

शोभना चौरे said...

ojsvita liye achi kavita.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

"kuchh hona chahiye baaki, jo dil ko chubhata rahe
pata to rahe ham zindaa he"
kher..jayantji,
ye jo kavita hoti he naa aapki aatmaja hoti he, aatmaza aapko sambhaalti he, khyaal rakhti he, paalati he...//
jo josh shbdo me he vo jindagi me bhi hota he/
meri shubhkamnaye aapke saath he, sangharsh karte rahe, ladte rahe aour hnaa likhte rahe.

महेन्द्र मिश्र said...

आखों में आग पैदा कर,
ख़ुद ही मशाल बना ले..
bahut badhiya bhavapoorn sher

Sangeeta said...

very motivating.....well said.

Blogvani

www.blogvani.com

FeedBurner FeedCount