Tuesday, June 2, 2009

म. फि. हुसैन.. (सावधान... बहुत संवेदनशील पोस्ट)


प्रथम
तो आप सबसे मैं कर-बद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हूँ कि इस विषय पर यहाँ पर मुझे ऐसी पोस्ट लगानी पड़ी।
'पड़ी' इसलिए कहा, क्योंकि:
) ये उचित स्थान नहीं है॥ मेरा ब्लॉग कविता और साहित्य के लिए है। और आप सब उसके ही लिए आते हैं।
) इसका विषय और भाषा भी उचित नहीं है। शालीनता और संवेदना को क्षति पहुचाना है॥
) आपकी भावनायों को भी अति क्षति पहुचा सकता है॥

इसलिए, आप सबका मैं दोषी हूँ। विशेषकर माताओं और समस्त महिलायों का॥
मैं विशेष निवेदन करता हूँ कि आप मुझे क्षमा करेंगे और आगे भी कृपा द्रष्टि बनाए रखेंगे।
आप सब से सदैव संबल मिला है और इस बार, मुझे और भी ज्यादा सहारा चाहिए।


अपने आहत मन,
और आहत माँ का क्या करूँ?
किसे, कैसे दिखाऊँ?
कहाँ जा कर रोऊँ?

आप सोचते होंगे,
कि मैं क्यो इतना बुरा मान रहा हूँ?
आख़िर कला है,
उसे कला के रूप में क्यों नहीं लेता हूँ?
जब मेरी माँ को, कोई, नग्न रूप में दिखाता है,
तो मैं कैसे चुप रह सकता हूँ?

किंतु हर कला और कलाकार कि एक सीमा होती है।
बिन मर्यादा, सब सून... वो कला नहीं, घिनौनी होती है॥

यहाँ तो हुसैन ने हर सीमा को तोड़ दिया,
हर लक्ष्मण रेखा को लाँघ दिया॥
अब तो उन्होंने भारत माँ को भी,
बीच बाजार नंगा कर दिया॥

"बाजार" इसलिए कहा,
क्योंकि ये भाई साहेब,
अपनी 'कला' को बेचते हैं।
वो भी मंहगे बाजारों
में,
और भी मंहगे दामों में,
नंगई का भोजन खाते हैं॥

तो हुए ना यह भी बाजारू?
और उन शोषित महिलायों
से,
करोड़ों गुना बाजारू,
जो सिर्फ़ अपना तन बेचतीं हैं,
वोह भी विवशता में..
ये तो अपना मन,
और करोड़ों की भावनाएं बेच रहें हैं,
बिना 'विवशता', बस लालच में...

कृपया देखिये इन तस्वीरों को।
http://www.hindujagruti.org/activities/campaigns/national/mfhussain-campaign/


मैंने कई दिवसों तक,
अपने आप से युद्ध किया,
अपनी आत्मा से लड़ा॥
चाहा कि इसे भूल
जाऊं,
अपने काम से काम रखूँ,
औरों जैसा बन जाऊं॥
मैं भी तो एक कलाकार हूँ,
शब्दं से चित्र बनाता हूँ,
तो इसे भी कला समझूं।
पर क्या करुँ??
नग्न नहीं देख सकता,
अपनी माँ को
भारत माँ को,
सरस्वती माँ को,
लक्ष्मी माँ को,
सीता माँ को....

किस किस से निगाहें चुराऊँ?
कैसे अपनी मन के नेत्रों को बंद करूँ?
कैसे अपनी आत्मा को शांत करूँ?
कैसे ह्रदय की कचोट को बंद करूँ?

कृपया बताएं!!!

~जयंत



Namaste All,

I battled with my conscience for many days, before I decided to send this out to all of you.
Most of you are devoted Hindus and all of you are Bhaarteey, therefore I was painfully aware of hurt and shock this might cause you.
However, there are certain things and times in our lives, when we have to come face to face with extremely distasteful and disturbing situations in the form of an object or an event.

In this situation, we are faced with certain objects 'created' by one of the most 'famous' painters of Bhaarat.
And he is the one who most of the 'Indians' are proud of.
He is the one who gets invited to many ceremonies and events with great fanfare.

Please be aware that the link given below contains pictures of paintings by M. F. Hussain.
And you might find them extremely offending, not to mention language that describes the meanings of those paintings.
But I had no choice, as you have to "call a spade, a spade".
It brings no good to keep your eyes shut and pretend that these things do not exist.
It causes no good to turn your face away and ignore the distasteful situation....

M. F. Husaain has lived up to his name, and after showing Saraswati Maa, Durgaa Maa, Sitaa Maa, has now proudly shown Bhaarat Maa in naked form.
There is nothing secular about it.
There is nothing artistic about it.

Please see below and you will see why it hurts me so much.

http://www.hindujagruti.org/activities/campaigns/national/mfhussain-campaign/

~जयंत

13 comments:

अमिताभ श्रीवास्तव said...

priya jayant,
aapne koi galat nahi kiya, esi hi nahi balki esi tamaam saarvajanik sthalo par uske kukarm ki baat honi chahiye/
aapko shayad pataa nahi hoga, hamare akhbaar me uske baare me "halkat husen" namak shirshkadheen lekh prakashit hua tha aour us par usne mukdma bhi thoka thaa//kher..baat puraani he, kintu filhaal jis andaaz me aaj aap blog par prastut hue uske liye meri aour se badhaai swikaar kare/// sach ko kahne me shbdo ke saath bhi thoda bahut nangaa ho jaane me burai nahi, kyoki jo nangaai chitra banaakar vo bech rahaa he, usase uski maansikta ka parichaya aasaani se milta he//

Jayant Chaudhary said...

अमित जी,

आपके साथ और समर्थन का बहुत आभारी हूँ मैं.
आप जैसे व्यक्ति से हौसला मिले तो और भी अच्छा लगता है.
कोटि कोटि धन्यवाद.

~जयंत

Babli said...

पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ की आपको मेरी शायरी पसंद आई!
आपका ये पोस्ट मुझे बेहद पसंद आया!

mark rai said...

मुझे नहीं लगता कुछ गलत है....अपने भावनाओं को लेखनी में ढालना गलत नहीं हो सकता..

सौरभ शर्मा said...

जयंत जी, मै भी आप के साथ हूँ
मेरा मन भी विचलित हो जाता है जब कोई हमारी भारत माता के साथ ऐसा घिनोना कार्य करता है.
पर हमारे देश के बुद्धिजीवी इसको कला कहते हैं
पता नहीं वोह हम आम जनता की तरह क्यों नहीं सोच पाते हैं

Kashif Arif said...

जयंत भाई! ये तो बहुत पुरानी बात है, इस पर बहुत लोग लड़ चुके है और हुसैन जी को बहुत गालियाँ भी पड़ चुकी हैं!
बहुत सारी पोस्ट, आलेख, और भी बहुत कुछ हो चूका है....

अब क्योँ गडे मुर्दे उखाड़ रहे हैं?

डुबेजी said...

JAYANT JI SADAR NAMASKAR......MERE BLOG PAR ANE AUR TIPPANI KE LIYE DHANYAWAD.....APKA BLOG DEKHA AUR PADHA BHI....SHANDAR ....BADHAI

vandana said...

jayant ji
aapki rashtra bhawana kabil-e-tarif hai.
aapka kahna sahi hai .kaise hum apne desh ka apni maa ka apman sah sakte hain aur yeh to jaise sampoorna nari jati ka apman hai.

chahe kabhi bhi uthe yeh mudda magar uthna jaroor chahiye.

ek rashtrapremi ki bhavnaon ka hamein samman karna chahiye.

Shamikh Faraz said...

ji bilkul theek kah rahe hain jayant ji. kabhi waqt mile to mere blog par bhi aaye.

Jayant Chaudhary said...

बबली जी,
मार्क जी,
सौरभ जी,
दुबे जी,
वन्दना जी,
और शमिख जी,

आप सब के समर्थन का बहुत बहुत आभार...
चुप रहने से तो कही अच्छा है, बोलना...
बोल के लैब आजाद हैं!!!

कई वर्षों से, जब से सुना था, मि. हुसैन का कारनामा, कभियो इतना दुःख नहीं हुया था, क्योंकि इन तस्वीरों को देखा नहीं था.. और सीता माँ/रावण/हनुमान जी वाली पेंटिंग के बारे में पता नहीं था.. उसने और भारत माँ वाली ने साड़ी हदों को तोड़ दिया... मुझे हिला दिया.. यदि अब भी मैं चुप रहा तो.. मेरा अस्तित्व ही क्या??

आपके साथ का आभार...
मैं सिर्फ बोलना ही नहीं, कुछ करना भी चाहता हूँ... फिर आगे जैसे होगा देखेंगे..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

कासिफ भाई,

कुछ चीजें पुरानी होने से भुलाई नहीं जाती.
यह उनमे से एक है.
मैं खुद "बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध ले" पर अमल करता हूँ,
पर ये तो ऐसा मुर्दा है जो चौराहे पर टंगा है,
जिसने खूंटा मेरे दिल पर ही गाड़ा है...
यह ऐसा मुर्दा है, जो कभी गाड़ा ही नहीं गया,
इसके गंध मेरे फेफडों में बस गयी है..
यह ऐसा मुर्दा है, जो कल फिर और मुर्दे बनाएगा,
बाकी के लोग इसे ही उदाहरण समझ कर (और सब चलता है कह) आगे और भी घिनौने द्रश्य दिखाएँगे..

यह मुर्दा तो तब गड़ता, जब:
१) मियाँ हुसैन माफी माँगते.
२) इन पेंटिंग को नष्ट कर दिया जाता.
३) इस तरह की पेंटिंग्स को बैन कर दिया जाता.
जब "लज्जा" और "सतानिक वेर्सेस" को बैन किया जा सकता है, तो फिर मिया हुसैन को क्यों नहीं??
और इसमे कौन सी आर्ट है??

एक नहीं, दो नहीं... ये तो बनाए जा रहे हैं..
और लोग बस चुप बैठे देख रहें हैं!!!!!

कासिफ भाई,

मेरी माँ के साथ जो हो रहा है, कैसे भुला दूँ?? आप बताएं!

~जयंत

निर्झर'नीर said...

jayant bhai

man kya aatma bhi ahhat kar di is saaaaa..e. ne to(gali likhna sanskaro ke khilaaf hai isliye nahi likhunga )

aapka priyas vandniiy hai

bas jyada kya likhun ..desh ka durbhagy hai

AlbelaKhatri.com said...

jayantji, aapne is sandarbh ko utha hi liya hai toh ab yah kuchh parinam bhi lekar aaye...aisee main kaamna karta hoon
is namurad rangbaaz ne jo badrangi failai haivah kshmya nahin hai....kisi soorat me muafi yogya nahin hai..keval aur keval dandneey hai.....
mera poorna samarthan aapke saath hai...haalanki kavisammelanon me toh is ghinaune kritya par hum bahut bolte hain...lekin ab is munch par bhi aawaz buland ki jaayegi.........aapka aabhaari hoon ki aapne is par dhyan diya...
JAYANTJI, JIS DIN YE GHINAUNA JEEV MUJHE SAKSHAT KAHIN MIL GAYA TOH MAIN APNAA SAARA HUNAR AUR PARAKRAM DIKHA DOONGA>>YE MERA VADA HAI
aapki jai ho!

Blogvani

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