Tuesday, June 23, 2009

कसाब के मुकदमे पर 30 लाख का खर्च और सैकड़ों जान बचाने वाले को 500 रुपये


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कसाब के मुकदमे पर 30 लाख का खर्च और सैकड़ों जान बचाने वाले को 500 रुपये

इसे पढ़ने के बाद अत्यन्त दुःख के साथ निम्न विचार आए:-

अपनी आजादी को हम हरगिज बचा सकते नहीं...
सर झुका सकते हैं, लेकिन सर कटा सकते नहीं..

धर्म निरपेक्ष पार्टियों के राज में यही सब होना है..
वैसे मेरा भी एक छोटा सा रोना है...
जैसी होगी प्रजा,
वैसा मिलेगा राजा..

देशभक्त खाएँगे सूखी रोटी,
गद्दार खाएँगे मोटी बोटी,
और खाएँगे लजीज़ कबाब,
हमारे मेहमान मियाँ कसाब..

~जयंत

9 comments:

ओम आर्य said...

bahut hi jaayaj hai yah ronaa........sahi jagah par tis to hoti hai.........badhiya

AlbelaKhatri.com said...

it happenj only in india ....ha ha ha ha ha

निर्झर'नीर said...

Albela ji ne sahi kaha hai..
it happens only in india

Priya said...

kasaab ke prati bharat sarkaar ke ravaye par vyang achcha laga

रंजना said...

एकदम सही.....

महेन्द्र मिश्र said...

सामायिक और सटीक और एक हकीकत से लबरेज व्यंग्य. बधाई.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

"सच तो यह है... कल हमने (एक कमेटी के साथ) मिल कर हमारे टेक्सास के शहर में मंदिर में कुछ मूर्तियाँ स्थापित करवाईं...
बहुत सुन्दर और शुभ कार्य था... बहुत आनंद आया.. उस आयोजन के पश्चात घर लौटने पर इन विचारों ने जन्म लिया...."
man ko bhaa gaye jayantji aap//kyaa behatreen vyakti ho, videsh me bharatiyataa ko samman../maa ki moorti sthapit karnaa..//sach me filhaal mere paas shbd nahee he bhavo ke bahne ke kaaran.///aapko badhai aour shubhkamnaye detaa hoo..khoob unnati karo,khoob naam kamao, apna, apne mata pita, apne desh ka maan samman badao...AAMEEN

जितेन्द्र दवे said...

बहुत सटीक और धारदार उदगार. भाई आप जैसे लेखक इस भारतभूमि में 'अल्पसंख्यक' हैं. फिर भी लीक से हटकर लिखते रहने के आपके साहस को नमन. माँ शारदा आपकी लेखनी और आत्मविश्वास को सबल - सशक्त बनाए.

गौतम राजरिशी said...

मन कुछ अजीब सा हो गया...

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