Monday, June 1, 2009

> मलाई, ज़रा कम है!!! < (~जयंत)


ये
अपनी चांदी की थाली में,
मलाई कम देख, रोते हैं,
और देश के लाखों बच्चे,
अब तक भूखे, रोते रोते सोते हैं...

अपने इटालियन ग्लास में,
विदेशी मय कम देख, दुखी हैं,
और देश के करोड़ों घरों में,
अब तक पानी की गलियाँ, सूखीं हैं...

मंत्रालय बंटवारें में अपनों से हुए,
अन्याय को लेकर, भड़कतें हैं,
और लाखों मजबूर आज भी,
न्याय के लिए के दर दर, भटकतें हैं...

अपने पुत्र पुत्रियों के लिए,
ये मंत्री पद का, संरक्षण करते हैं,
और देश के लाखों बच्चों के,
भविष्य का धीरे से, भक्षण करते हैं...

दिखावे की संवेदना हेतु,
ये घड़ियाली आंसू, रोते हैं,
और इनकी छाया में नौकर-बच्चे,
चीथडों में अपना बचपन, खोते हैं....

अपने कथित योगदान की,
उपेक्षा पर, अति क्रोधित हैं,

बस भूल जाते हैं उन लाखों को,
जो पीड़ित, उपेक्षित, शोषित हैं....

और देश का भाग्य तो देखो,
जो जन पीड़ित और शोषित हैं,
वो अब तक अंधे बहरे बनकर,
इन भेड़ियों पर ही, मोहित हैं...

~जयंत चौधरी
२८ मई, २००९


(काजल कुमार जी के सुंदर कार्टून पर, संजय बेंगानी जी की बेबाक टिपण्णी से यह विचार मिला॥ दोनों का आभार...)

12 comments:

Harkirat Haqeer said...

ये अपनी चांदी की थाली में
मलाई कम देख रोते हैं
और देश के लाखों बच्चे
भूख से रोते रोते सोते हैं

वाह बहुत खूब.....!!
भारत देश की त्रासदी को बखूबी दर्शाया है आपने .....!!

vandana said...

lajawaab ,shandaar.
itna sahi likha hai aur apne aakrosh ko shabd diye hain jo ki haqeeqat hai , satya hai.
bahut badhiya , aise hi likhte rahein.

AlbelaKhatri.com said...

bhai waah! kya kah diya aapne!
jiyo!
jiyo!
maza aagaya
bahut hi achha

रंजना said...

क्या कहूँ....बहुत बहुत उम्दा लिखा आपने...,.लाजवाब....बिलकुल लाजवाब !!

वर्तमान त्रासदी को कितने सुन्दर और सार्थक ढंग से अभिव्यक्ति दी है आपने....मन मुग्ध हो गया इस सुन्दर अभिव्यक्ति को देखकर...वाह !!

Priya said...

shabdo se buni ek sachchi tasveer....

संजय बेंगाणी said...

क्या कहें. नकारखाने की तुती...? मगर चुप रहना भी अपराध है. कोई यह न कह सके कि व्यवस्था का विरोध हुआ ही नहीं था.

सुन्दर.

Jayant Chaudhary said...

रंजना जी,

बहुत बहुत धन्यवाद. आपने जो प्रोत्साहन दिया.

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

संजय जी,

सच कहा... भले ही कोई तूती की आवाज ना सुने, उसे तो बजाना ही है.

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

वन्दना जी,

आप तो मुझे सहस्त्र प्रोत्साहन देती हैं.
आपका मैं तहे-दिल से आभारी हूँ.

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

हरकीरत जी,

आपका मैं बहुत मान करता हूँ.
आपके चंद शब्द ही बहुत हैं मेरे लिए.

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

प्रिया जी, प्रिय अलबेला जी,

आप मेरे आधार स्तम्भ बन चुके हैं.
आप ना आयें और टिप्पडी ना दे तो मजा नहीं आता.

~जयंत

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बहुत सुंदर. विचारों की अभिव्यक्ति बहुत आवश्यक है.

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