Thursday, April 2, 2009

स्त्रीयता गुहारती है !!

(१)
एक दिन बात नयी होगी,
नारी की कैद ख़तम होगी..

अंधेर दमन का मिटाने को,

समानता की सुबह होगी..

(२)
मौन हैं सब, पर
स्त्रीयता गुहारती है..

माँ के दूध की धार,
सबको दुत्कारती है..

एक ना एक दिन,
टूटेंगी सब बेडियाँ..

उठ, बाहें फड़का,
कि, मानवता
पुकारती है...

~जयंत चौधरी
४ अप्रैल २००९
(कुछ लोगों के ब्लॉग पढ़ कर यह विचार आए...)

10 comments:

अनिल कान्त : said...

pasand aaya mujhe aur maine to click bhi kar diya ...bahut achchhi rachna

mehek said...

bahut sahi baat,ek din ye badiya tut jayengi,sunder likha hai.kuch agni jwala uthi man mein.

Jayant Chaudhary said...

महक जी और अनिल जी,

आप लोगों का आभारी हूँ.

मेरी कविता के नन्हे से पौधे को,
आप प्रोत्साहन-अमृतरस पिलाते हैं..
मेरे छोटे छोटे प्रयासों को,
नित मुक्त भाव सराहते हैं..
मेरा उपवन तो पूरा सजा नहीं,
आप फिर भी कांति से महकाते हैं..
ज्यादा कुछ ना कह पायें,
बस, हम धन्यवाद दे जाते हैं....

आते रहियेगा...

~जयंत

संगीता पुरी said...

बहुत सुदर लिखा ...

mark rai said...

jindagi me kam hi mouke aate hai jab aise khyaal aata hai....marmspashi rachna...

Tripti said...

Hi Jayant,

Thanks for all the nice and kind words.

Those four line you wrote to me were very touchy, will wait for more.

Take care

अल्पना वर्मा said...

'एक ना एक दिन,
टूटेंगी सब बेडियाँ..
उठ, बाहें फड़का,
कि, मानवता पुकारती है...'

दोनों छोटी कवितायेँ बहुत ही गहन भाव लिए हुआ हैं.नारी मुक्ति की बात यूँ तो बहुत करते हैं.आप ने अपनी इन कम पंक्तियों में बहुत कुछ कह डाला .

अनिल कान्त : said...

आपने मेरी पोस्ट पर अपने विचार रखे उसके लिए शुक्रिया ....मेरी उस पोस्ट का सिर्फ और सिर्फ एक ही मतलब है ...कि मैं ईश्वर के अस्तित्व को नहीं मानता ...क्योंकि मुझे ऐसा कुछ न ही एहसास हुआ और न ही उसकी शक्ति का आभास .....और जब तक मुझे खुद स्वतः इस बात का एहसास नहीं होगा तब तक मैं तो नहीं मान सकता ...
मैं आपकी राय से भी सहमत हूँ

Jayant Chaudhary said...

अल्पना जी,

आपने सदैव मुझे प्रोत्साहित किया है.
आपने ही तो ब्लॉगवाणी का मार्ग दिखाया था.
मैं आपका सदैव आभारी रहूंगा उसके लिए.

धन्यवाद,
जयंत

Jayant Chaudhary said...

संगीता जी,

आपके विचार मुझे अलग तरह की ताकत देते हैं.

कोटि कोटि धन्यवाद,
जयंत

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