Saturday, May 2, 2009

मगर प्यार का रंग ना बदला..


रंगों से लदते थे वन-उपवन,
लील गया उन सबको पतझड़,
जाने कितने मौसम बदले,
मगर प्यार का रंग ना बदला...

जाने कैसे, कब, हम रंगाए,
विरह के अगनित अश्रु बहाए,
पर मेरे मन की चादर से,
तेरे प्यार का रंग ना निकला...

भौतिक कठिनाई से सब थर्राए,
क्षणिक अनुरक्ति भी मुरझाए,
पीड़ा की भीषण ज्वाला से,
मगर प्यार का रंग ना पिघला...

समय का पहिया घूमता जाए,
फ़िर यौवन छोड़ बुढापा आए,
परिवर्तन आए कई जीवन में,
मगर प्यार का ढंग ना बदला...

~जयंत चौधरी
२२ अप्रैल 2009

(हरकीरत जी के कहने से मैंने पुष्प की तस्वीर बदल दी है॥)

25 comments:

अनिल कान्त : said...

Bahut khoob bhai ..pyar to aise hi hota hai !!

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

ARUNA said...

चाहे कुछ भी बदल जाए प्यार तो प्यार ही रहता है!
क्या जादू किया इस प्यार के रंग ने जो रंगों का त्यौहार भी याद नहीं रहता है!

Jayant Chaudhary said...

अरुणा जी,

क्या बात है..
आनंद आ गया...

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

अनिल भाई..

आप ना आयें तो मेरा ब्लॉग सूना हो जाएगा..
:)

~जयंत

mehek said...

समय का पहिया घूमता जाए,
धीरे से यौवन छोड़ बुढापा आए,
कई परिवर्तन आए जीवन में,
मगर प्यार का ढंग ना बदला...

waah sunder baat kahi,umar ke saath bhi fika na pade hai dil ka rang.

Tripti said...

Dear Jayant,

Very nice poem about love, also the flower as fresh on your post as it does on the plant.

Good work.

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

bahut badhiya rachana.dhnaywad.

mark rai said...

nice picture and post....aapke collection ki daad deni padegi....

शोभना चौरे said...

bgwan kre ye pyar sdev bana rhe.
pushap ka photo bhut hi achha laga.

Sangeeta said...

dear jayant ,
nice lines about love...yes it is true that if u have it(love), u don't need to have anything else and if u don't have it , it doesn't matter much what else you have. There is a very beautiful relation between FLOWER and LOVE.
sangeeta shukla

अल्पना वर्मा said...

समय का पहिया घूमता जाए,
धीरे से यौवन छोड़ बुढापा आए,
कई परिवर्तन आए जीवन में,
मगर प्यार का ढंग ना बदला

bahut khuub likha hai..

wah pyar hi kya jo samay ke saath badal jaye..

phool ki tasweer achchee khinchi hai.kavita ke vishay se mel kha rahi hai.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

prem ko shbdo me dhhalna vo bhi uski sarsta ke sang, aamtor pr ab kathin ho chalaa he/hna likhte khoob he, kyuki prem me bhavnaye vyapak ho jaati he, achha bhi likhaa jaa rahaa he, bahut likha jaa rahaa he///kintu.....aapki rachna//////are nahi bhai ...sach me achhi lagi/ pyaar ka rang naa badla, tere pyaar kaa rang naa nikla, magar pyaar kaa rang naa pighla aour magar pyaar kaa dhang naa badlaa////ise poori karti panktiyo me knhi darshn he to knhi aatmiya kriyaye,yaani bhavnaye// sabkuchh badlta he prem nahi badlta//kyuki prem to sirf prem he, uska naa janm aour naa maran//vo apne sthai bhaav me aasin rahtaa he//
kintu jayantji, prem badlta bhi he,,,kese???
jab prem kiyaa jaataa he tab// prem hota he tab nahi// karna kriyaa he, lihaza kriyaa privartit hoti rahti he//isliye maanaa gayaa he ki karne vala prem prem nahi hota uska sahyogi ho sakta he//kher...bahut achcha likhaa he aapne//
badhai///

Jayant Chaudhary said...

एक हैं वो अमिताभ जी, जिन्हें मैं बहुत मानता हूँ...
क्योंकि, उनके अभिनय और व्यक्तित्व में गहराई है..
उन्हें समझ है हिंदी की, भावनाओं की... आखिर हरिवंश राय जी के सुपुत्र हैं..

और एक और अमिताभ जी है, जिन्हें मैं मानने लगा हूँ..
आप में भी गहराई है.. समीक्षा में और सुझावों में भी..
आनंद आ गया आपकी बातें पढ़ कर..

जैसा किसी गाने में कहा गया है..
"प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है..."

मैं भी आपसे सहमत हूँ, जहां क्रिया है, तो क्रिया की परिभाषा से,
उसमें बदलाव तो आना ही है... :)

कोटि धन्यवाद,
~जयंत

Jayant Chaudhary said...

अल्पना जी,

आगमन का धन्यवाद्.. विगत कई दिवसों से आप पधारे नहीं थे..
मुझे लगने लगा था की मेरे पोस्ट की धार कम हो गयी है. :)

फूल की तस्वीर पसंद करने के लिए धन्यवाद..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

महेंद्र जी,

आगमन का धन्यवाद्..
आशा करता हूँ अब आपको ज्यादा समय मिलेगा...

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

महक जी,

आप कई दिन बाद आए,
हमारे ब्लॉग को महकाए..
हम धन्यवाद में सर नवाए..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

आह मार्क जी,

आपने तो चढा दिया मुझे...
चने के झाड़ पर.. :)

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

शोभना जी,

कोटि कोटि धन्यवाद..
आपके आगमन से मैं भी आपका ब्लॉग पढ़ पाया..
बहुत बहुत आनंद आया..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

तृप्ति जी,

फूल की तस्वीर पसंद करने और टिपण्णी के लिए धन्यवाद..

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

संगीता जी,

आपने सच कहा...
प्यार ना हो तो हर रंग फीका है,
प्यार हो तो मरू भी रंगीला है..

~जयंत

Babli said...

बहुत बहुत शुक्रिया आपकी टिपण्णी के लिए!
मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! आपने बहुत ही ख़ूबसूरत कविता लिखा है!

Harkirat Haqeer said...

जाने कैसे,कब,हम रंगाये
विरह के अगनित अश्रु बहाए
पर मेरे मन की चादर से
तेरे प्यार का रंग न निकला
मगर प्यार का रंग न बदला.....

बहुत खूब....!!

जयंत जी,
आपके प्यार का रंग यूँ ही बना रहे ....और आप यूँ ही नज्में लिखते रहें.....!!
फूल की तस्वीर बहुत अच्छी लगी...... पर प्यार के प्रतिक गुलाब की होती तो और ज्यादा जंचती ....!!


[हाँ आपने इतनी गहरे से रचना को पढ़ा उसके लिए शुक्रिया ....!!]

M.A.Sharma "सेहर" said...

Pyaar ka rang na badla ..
badalna bhee nahi chahiye..

bhawnapradhaan abhivyakti !!!

Jayant Chaudhary said...

हरकीरत जी,

बहुत आभारी हूँ आपके आगमन का.
आपका वरद-हस्त मिला..

आपके कहे अनुसार मैंने चित्र बदल दिया है.
आशा करता हूँ ये पसंद आयेगा. :)

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

सेहर जी,

आगमन का धन्यवाद..

~जयंत

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