Sunday, May 10, 2009

* माता का कर्ज *


जो अपनी माता का ना हुआ,
वो किसी का क्या हो पायेगा,
माता का कर्ज ना उतरेगा,
चाहे लाखों बार चुकायेगा,

इसने तुझको पाला पोसा,
यह बात कैसे झुठ्लायेगा,
जिस गोदी में पल बड़ा हुआ,
उससे बड़ा नहीं हो पायेगा,

माता पर जो तुने वार किया,
महापाप से कैसे बच पायेगा,
जीवन को ग्रहण लग जाएगा,
तू दर-दर की ठोकरें खायेगा,

जिनने तुझे वट-वृक्ष बनाया,
उन जड़ों को कैसे काटेगा,
उन पर जो तूने वार किया,
तो ख़ुद जीवित कैसे रह पायेगा,

इतिहास तेरा कैसा भी रहा,
उससे पीछा कैसे छुडाएगा,
कैसे भी हो, तुझे ढूंढ के, ये
भविष्य में फिर जायेगा,

जननी से जो प्रेम करेगा,
और पुत्र धर्म निबाहेगा,
जो उसका हित ध्यान रखेगा,
धरती पर स्वर्ग वो पायेगा....

(मातृ दिवस पर, संसार की माताओं को भेंट)
~जयंत चौधरी
मई २००९

( इस कविता में, माता के दो रूपों के बारे में लिखा गया है...
एक तो हमारी जन्मदाई माँ, और दूसरी भारत माँ...
मैंने उन लोगों पर भी कटाक्ष करने का प्रयास किया है,
जो भारत माँ के आँचल को छलनी कर रहें हैं... )

15 comments:

ARUNA said...

bahut khoob jayant ji! Mujhe meri maa ki yaad aa gayi!

Pyaasa Sajal said...

imaandaari se apne kuch vichaar rakh raha hoon...umeed hai ki aap kisi baat ka bura nahi maanenge...

ye kavita ek behad sensitive issue par hai..ek maa aur unke prati humara samman...aur shaya usme din dar din aati ek kamee...par ye rachna jazbaati to hai,lekin practical nahi...

mahaapap,jeevan ko grahan,uspe vaar kiya to khud jeevit kaise reh paayega,dharti par swarg paayega.....ye saare expressions bas kitaabi baatein lagti hai...baat bas itni si hai ki jisne humaare liye itna kiya hai,uska agar hum samman na kare to hum khud ko maaf nai kar paayenge,humara mann khud ko kachotta rahega,par jise isse fark nahi pad raha us ye swar aur mahaapap jaisi baato se bhi koi fark nahi padtaa...

ummeed hai aap meri baato ko anyatha naa lenge,rachna zaroor achhi hai,aur ho sakta hai isse aapki bhaavnaaye judi ho jinko main kisi prakaar thes nahi pahuchaana chahta...par jo socha wo share kar raha hoon bas :)

www.pyasasajal.blogspot.com

AlbelaKhatri.com said...

mata k dono roopopn k sath uske beton ne jo anyay kiya hai us par prahar karta aapka geet badhai ka patra hai isliye KHOOB BADHAIYAN

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत सुन्दर रचना....बधाई.

RAJNISH PARIHAR said...

मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐं.

mark rai said...

bilkul sahi samay par behad achchhi rachna.....
mother,s day ki subhkaamna...

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर.

मातृ दिवस पर अनुपम प्रस्तुति!

Shefali Pande said...

उसकी ही जिन्दगी संवर पाती है
माँ जिसकी सुख पाती है ....बहुत अच्छा लिखा आपने बधाई

Tripti said...

Good one!!thanks for the poem you dropped at my blog.

Jayant Chaudhary said...

प्यासा सजल जी,

मानता हूँ की एक हद तक आपका कहना सच है..
किन्तु यदि कोई कुछ बोलेगा ही नहीं तो वो ना मानने वाले बढ़ते ही जायेंगे..
"महापाप, जीवन को ग्रहण..." आदि शब्दों का उपयोग किया ताकि
कोई गैंडे जैसे चमडी वाला भी थोडा तो प्रहार अनुभव करे.

और वैसे भी कवी और कविता भावों पर ही पलते हैं..
मानो तो गंगा माँ हूँ...
ना मानो तो बहता पानी...
:)

~जयंत

Jayant Chaudhary said...

शेफाली जी,

क्या बात कही है आपने..
यही तो हमारी संस्कृति की विशेषता है..

आने के लिए धन्यवाद..

जयंत

Jayant Chaudhary said...

समीर जी,

बहुत दिनों बाद आपकी लैंडिंग हुयी..
हमारी किस्मत देर से खुली...

:)

जयंत

Jayant Chaudhary said...

मार्क भाई,

धन्यवाद, मार्के की बात कहने के लिए..

जयंत

Jayant Chaudhary said...

रजनीश जी और वन्दना जी,

धन्यवाद... पधारने के लिए.

जयंत

Jayant Chaudhary said...

अलबेला जी,

आप से पसंद आई..
हमें प्रोत्साहन मिला...

नमन,
जयंत

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