Sunday, April 26, 2009

~ मेरी कविता ~



मेरे
पास,
हर साँस,

जैसे उल्लास,
एक अहसास,

अदम्य साहस,
आत्म
विश्वास,

कभी सुखद,
कभी
विषाद,

अमिट प्यास,
अधूरी आस,

जैसे छलावा,
एक
मृग-मरीचिका,

मेरी वीरता,
या धीरता,

एक तरंग,
मदमस्त उमंग,

मेरा आसमां,
सारा
जहाँ,

उत्तंग हिम-शिखर,
शीतल मान-सरोवर,

मेरा दिनकर,
या मधुकर,

कुछ कहो,
कौन
हो?

उसने कहा,
तेरी कविता

~जयंत चौधरी
२२ अप्रैल २००९
(एक लहर सी उठी.... और मन के रेत पर ये मोती छोड़ गयी॥)



8 comments:

अनिल कान्त : said...

भाई जान बहुत गहरे भाव हैं ....मुझे बहुत अच्छी लगी आपकी कविता

mark rai said...

nice work...ek different swaad ki kavita ...

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर रचना है।बधाई\

अल्पना वर्मा said...

कम शब्दों में अभिव्यक्ति को व्यक्त करना बहुत खूब लगा !
शब्द चयन बेहद सुन्दर और इनका गठन भी अद्भुत!

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह जयंत जी बहुत उम्दा लिखा है।

अमिट प्यास

अधूरी आस,
जैसे छलावा

एक मृग-मरीचिका,

गहरी बात साधे शब्दों में।

अमिताभ श्रीवास्तव said...

do pankti me apne bhavo ko utarna aour artho ke saath khelnaa aasaan nahi hota, aapne ise saadhaa he..lihaza WAAH WAAH to karni hi hogi, bhai achcha lekhan padhne ki baat hi kuchh aour hoti he..
shukriya bhi aour saadhuvaad bhi..

ARUNA said...

ati sundar.

जयंत जी बधाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! आपका कमेन्ट पढ़के बहुत अच्हा लगा!

निर्झर'नीर said...

sundar shabd-kosh

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